वोट ज़रूर दें
क्योंकि वोट डालना हमारा अधिकार है, और
ज़िम्मेदारी भी !
जनतन्त्र में सबसे ताकतवर है जनता ;
क्योंकि जनता (अर्थात मतदाता) चुनाव में अपने
वोट के ज़रिए
अपना जनप्रतिनिधि (सांसद या विधायक) चुनती है |
वोट के ज़रिए वह नई सरकार बनाती है –
पिछली सरकार को वापस ला सकती है, या उसे बदल
सकती है ;
या एकदम नए लोगों को मौका दे सकती है !
इसीलिए
वोट का अधिकार बन सकता है जनता का हथियार –
जिससे वह नफ़रत फैलाने वालों, बँटवारा करने
वालों,
झूठे वादे करने वालों, धोखा देने वालों,
जनता के साधनों को लूटने वालों,
जनविरोधी, भ्रष्ट, बेइमानों को
सिखा सकती है सबक़ !
वोट का अधिकार बन सकता है जनता का औजार –
जिसके ज़रिए वह बदल सकती है
सरकार की तस्वीर, देश और समाज की तकदीर !
यह हम पर (मतदाता पर) है कि
वोट के इस हथियार/औजार को कर दें भोथरा और
बेकार,
या बनाएँ इसे ज़्यादा मज़बूत, ज़्यादा धारदार !
इसलिए
अपना कीमती वोट ज़रूर दें,
सोच-समझकर दें,
निडर होकर, बिना लोभ - लालच के दें !
·
जाति-बिरादरी, धर्म-सम्प्रदाय के नाम पर अपने
·
रुपए-पैसे, शराब, नशे या किसी लालच-स्वार्थ के लिए कीमती वोट को
·
किसी दबाव, दबंगई, धमकी से डरकर बेइज़्ज़त न करें !
‘नया इतिहास लिखने-लिखाने का समय फिर आ गया है,
तस्वीर में रंग भरने-सजाने का समय फिर आ गया है
|
नींद त्यागो, घर से निकलो, सोचो-समझो, वोट डालो,
जनतन्त्र की इज़्ज़त बचाने का समय फिर आ गया है
||’
* नसीर अहमद